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मुगल हरम की असली कहानी: क्या सच में वहाँ सिर्फ़ ऐश ही ऐश थी?

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सोचिए, जब आप 'मुगल हरम' का नाम सुनते हैं तो आपके जेहन में क्या तस्वीर उभरती है? संभव है कि वही तस्वीर दिखेगी जो फिल्मों और उपन्यासों में दिखाई जाती है - एक रहस्यमयी महल, जहाँ सैकड़ों खूबसूरत औरतें कैद हैं, बस बादशाह के मनोरंजन के लिए। एक ऐसी जगह जहाँ सिर्फ़ ईर्ष्या-द्वेष , कामुकता और साज़िशों का बाज़ार है। ये तस्वीर इतनी बार दिखाई गई है कि हम मानने लगे हैं कि यही सच है। लेकिन क्या यह पूरा सच है? क्या मुगल हरम सच में सिर्फ़ एक 'यौन अड्डा' भर था? अगर आप भी यही सोचते हैं, तो आप गलत है, क्योंकि असलियत कहीं ज़्यादा दिलचस्प और हैरान करने वाली है। 'हरम' शब्द का असली मतलब यह शब्द सुनते ही हमें 'हराम' (गलत/नाजायज़) याद आता है, है न? लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसका असली मतलब बिल्कुल उलटा है। 'हरम' असल में अरबी भाषा के 'हराम' शब्द से बना है, लेकिन यहाँ 'हराम' का मतलब गलत नहीं, बल्कि 'पवित्र' या 'निषिद्ध' होता है। मतलब ऐसी जगह जहाँ बिना इजाज़त कोई नहीं घुस सकता। जैसे मक्का के 'हरम-ए-शरीफ़' को ...